धर्म और सम्प्रदाय ( Religion and Community )
धर्म का शाब्दिक अर्थ धारण करना होता है । धर्म केवल कर्म पर आधारित नहीं है ये मन, वचन, कर्म का सम्मिश्रण(COMPLEX) है अर्थात जो कर्म हमें मन, वचन से करने ंचाहिये वही धर्म है । धर्म किसी जाति(CASTE), सम्प्रदाय9SOCIETY) का नाम नहीं है अपितु ये शाश्वत(INFINITE) है जिसका जन्म इंसान के उत्पत्ति के साथ ही हो जाता है । धर्म का अर्थ पदार्थ की प्रकृति(MATTER OF SUBJECT) से होता है जिस प्रकार अग्नि की प्रकृति जलाना है, जल की प्रकृति प्यास बुझाना है, सूर्य का धर्म उष्मा देना है उसी प्रकार प्रत्येक मानव का धर्म होता है जिसे मानव धर्म(HUMANITY) कहा जाता है और वह सर्वोपर्रि ) है । आदिकाल से लेकर अनन्तकाल तक इसकी प्रकृति नही ंबदलती, धर्म गुण है ।
विश्व के कुछ प्रमुख धर्म (Some famous Religion of World)
1. हिन्दु धर्म (110 करोड)
- शैव सम्प्रदाय
- वैष्णव सम्प्रदाय
- शाक्त सम्प्रदाय
- सौर सम्प्रदाय
- गणपत सम्प्रदाय
- श्रीकृष्ण प्रमाली सम्प्रदाय
2. बौद्ध धर्म(40 करोड)
- थेरवाद
- महायान
- वज्रयान
- झेन
- नवयान
3. जैन धर्म
- श्वेताम्बर
- दिगम्बर
4.मुस्लिम धर्म (170 करोड)
- सुन्नी
- शिया
5.सिख धर्म (2.5 करोड)
- उदासी सम्प्रदाय
- निर्मल सम्प्रदाय
- नानकपंथी
- खालसा
- सहजधारी
- नामधारी मूका
- निरंकारी
- सवरिया
6.ईसाई धर्म (230 करोड)
- आर्थोडाक्स
- रोमन कैथोलिक
- प्रोटेस्टेट
7.पारसी धर्म
नोट- सभी धर्मो के अनुयायिंयों की सं0 लगभग में है आंकडे वर्ष 2010-2015
वर्तमान समय में धर्म (Religion in present Time)
वर्तमान समय भारतवर्ष के लिये संक्रमण से गुजर रहा है यदि ये कहा जाये तो अतिश्योक्ति नही होगी । धर्म के नाम पर फैलाया गया पाखण्ड(HYPOCRISY) मनुष्य के सोचने की क्षमता क्षीण कर रहा है । लोग पाखण्डों में इतनी बुरी तरह धंस चुके हैं कि उन्हें असल में अपना भी बोध नही रहा है चंद लोगों की कही गई बातें और कुछ पुस्तकों की कुछ लाइनों को इंसान इस जगत का परम सत्य साबिेत करने प्रयाास हमेशा से करता रहा है । आज मानव विज्ञान(SCIENCE) की तरफ उन्मुख न होकर पाखण्ड के दलदल में लगातार फंसता जा रहा है । खैर धर्म माानना न मानना सबका निजी मामला है और हमारा संविधान इसकी छूट भी देता है लेकिन पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं पर गौर किया जाये तो हम देख पायेंगे कि इंसान कितना हिंसक हो गया है, धार्मिक प्रवृत्तियां लोगों में इस कदर हैं कि मामूली सी बात पर साम्प्रदायिक दंगे हो जाते हैं । हिन्दु, मुससमाान को मार रहा है तो मुस्लिम हिन्दुओं का गला काट रहे ंहै । ये कौन लोग हैं? जहां तक मैंनें पढा है कोई भी धर्म हिंसा को सही नही मानता है और न ही हिंसक प्रवृत्तियों में लिप्त होने ंको बाध्य करता है लेकिन फिर क्यों ये धार्मिक लोग हिंसा का सहारा लेते हैं और अपने आनें वाली पीढियों के लिये जहर बोने ंका काम कर रहे है । आज का हिन्दु कहता है कि भारतवर्ष हिन्दुवादी राष्ट्र था और जल्दी ही हिन्दुवादी राष्ट्र हो जायेगा क्योंकि हम हिन्दु सनातनी हैं । Arkeologist जान मार्शन नें पुरातत्विक विभाग के निर्देशक प्रो0 दयाराम साहनी के सहयोग से सन 1921 में पंजाब प्रांत में(वर्तमान पाकिस्तान)एक स्थान की खुदाई की थी तथा ये बताया था कि ये हडप्पा की सभ्यता थी । कई इतिहासकारों नें इस बात को बडी जोर देकर कहा है कि आर्य नामक बाहरी आक्रमणकारी जो मध्य एशिया से भारत में आये थे उन्होनें अपनी चालाकी और धूर्तता से यहां के मूल निवासियों को बरबाद कर दिया और एक उन्नत विकसित सभ्यता को हमेशा के लिये मिटा दिया लेकिन आज भी हडप्पा और मोहनजोदडो की खुदाई से प्राचीन भारत की उन्नत सभ्यताओं का सच पता चलता है क्या कोई इस सच को बदल सकता है जहा ंतक मैं समझता हूं शायद कोई नहीं। तो हिन्दु कैसे कह सकते हैं कि वो सनातनी है उनसे पहले भी भारतवर्ष मे कई सभ्यतायें थी जिनको आक्रमणकारियों द्वारा तहस नहस कर दिया गया । देखिये मुद्दा ये नहीं है कि कौन कितना सनातनी है "मायनें यह बात रखती है कि आपका धर्म, आपकी संस्कृति इंसानियत के कितनें करीब से जाती है । "
पिछले कुछ वर्षों की साम्प्रदायिक घटनाओं(COMMUNAL VIOLENCE) पर गौर किया जाये तो आकडें चौकाने वाले सामने आते हैं 2017 मे आई लोकसभी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 7-8 वर्षों में लगभग 7263 साम्प्रदाायिक तनाव(COMMUNAL VIOLENCE) के मामले सामनें आ चुके है जिनके कुल मिलाकर लगभग 953 लोगों की मौत हुई हैं
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