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धर्म और सम्प्रदाय ( Religion and Community )  धर्म का शाब्दिक अर्थ धारण करना होता है । धर्म केवल कर्म पर आधारित नहीं है ये मन, वचन, कर्म का सम्मिश्रण(COMPLEX)  है अर्थात जो कर्म हमें मन, वचन से करने ंचाहिये वही धर्म है । धर्म किसी जाति(CASTE), सम्प्रदाय9SOCIETY)  का नाम नहीं है अपितु ये शाश्वत(INFINITE) है जिसका जन्म इंसान के उत्पत्ति के साथ ही हो जाता है । धर्म का अर्थ पदार्थ की प्रकृति(MATTER OF SUBJECT) से होता है  जिस प्रकार अग्नि की प्रकृति जलाना है, जल की प्रकृति प्यास बुझाना है, सूर्य का धर्म उष्मा देना है उसी प्रकार प्रत्येक मानव का धर्म होता है जिसे मानव धर्म(HUMANITY) कहा जाता है और वह सर्वोपर्रि ) है । आदिकाल से लेकर अनन्तकाल तक इसकी प्रकृति नही ंबदलती, धर्म गुण है । विश्व के कुछ प्रमुख धर्म (Some famous Religion of World)  1. हिन्दु धर्म (110 करोड) शैव सम्प्रदाय वैष्णव सम्प्रदाय शाक्त सम्प्रदाय सौर सम्प्रदाय गणपत सम्प्रदाय श्रीकृष्ण प्रमाली सम्प्रदाय 2. बौद्ध धर्म(40 करोड) थेरवाद महायान वज्रयान झेन नवयान...

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