समाज


समाज क्या है
  (What is Society)

     मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है प्रारम्भ काल से ही मानव समाज के रूप में जीवन का निर्वहन करता आया है। मानव अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये किसी न किसी प्रकार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्षरूप से निर्भर रहता है । इस प्रकार मानवों के आपस में सम्बन्धों की श्रृखला ही समाज का निर्माण करती है ।मनुष्य समाज में रहकर अपना कल्याण व सुरक्षा की भावना महसूस करता है । अपनी दैनिक आवश्कताओं की पूर्ति के साथ-साथ समाज हमारा सर्वांगीण विकास करने में सहायक सिद्ध होता है । हमारा व्यवहार, पहनावा, भाषा, रहन-सहन इत्यादि पर  समाज विशेष का प्रभाव होता है, समाज मे रहते हुये मानव अन्य मानवों से आर्थिक,राजनैतिक, सामाजिक सम्बन्ध बनाता है जिससे वह अपना कल्याण कर सके, अपनी आवश्यकताओ की पूर्ति सहज रूप से कर सके । कोई भी समाज विभिन्न जाति, धर्म, समुदायों, वर्गों से मिलकर बना होता है ।   दुनिया के सभी समाज अथवा सम्प्रदाय अपनी स्पष्ट पहचान बनाये रखने के लिये अलग-अलग रीति-रिवाज,कर्मकाण्ड, पूजा की पद्धतियां आदि का निर्माण करते हैं जिससे समाज में उनकी एक स्पष्ट पहचान हो सके चूंकि समाज व्यक्तियों  के पारस्परिक संबन्धों की एक व्यवस्था है इसलिये इसका कोई मूर्त रूप नहीं होता इसकी अवधारणा अनुभूतिमूलक है परन्तु इसके सदस्यों में एक दूसरे के प्रति सत्ता और अस्तित्व की भावना कायम रहती है ।
                   
                  इस प्रकार हम देखते हैं कि समाज सामाजिक सम्बन्धों का जाल है


  समाज की परिभाषा (Defination)

      समाजशास्त्र का अध्ययन करने वाले विद्वानों को समाजशास्त्री कहा जाता है । किसी भी समाज  का गहन अध्ययन  करने के उपरान्त समाजशास्त्री किसी निष्कर्ष पर पहुचते हैं जिसका उद्देश्य समाज  को पूर्व से बेहतर और उत्कृष्ट बनाना होता है । समाज की परिभाषा के सम्बन्ध में कई विद्वानो में मतभेद है ।
   
    मैकाइवर व पेज के अनुसार, “ समाज रीतियों एवं कार्यप्रणालियों, सत्ता एवं मानव व्यवहार के नियंत्रणों एवं स्वतंत्रताओं की व्यवस्था है । यह सतत परिवर्तनशील है जिसे हम समाज कहकर सम्बोधित करते हैं

      इनका आशय है कि कोई भी मनुष्य किसी समाज मे रहते हुये परस्पर सहयोग,अपने व्यवहार द्वारा अपनें चरम स्तर पर पहुचनें का प्रयत्न करता है और यह प्रक्रिया ही समाज को जन्म देती है ।

      W.SEMAR और KELAR के अनुसार, समाज लोगों का एक समूह है जो आजीविका एवं मानव स्थिरता के लिये एक साथ रहते हैं


      PLATO के अनुसार, समाज व्यक्ति का स्पष्ट रूप है
   
           इस प्रकार विद्वानों द्वारा दी गई परिभाषाओं से हम देखते हैं कि समाज सामाजिक सम्बन्धों का जाल है । अब हम सामाजिक सम्बन्धों को पृथकरूप से समझने की कोशिश करते है ।


सामाजिक सम्बन्ध 
(Social Relationship)


        सामाजिक सम्बन्धों का निर्माण सामाजिक अंतःक्रियाओं से उत्पन्न होता है सामाजिक अंतःक्रिया तीन स्तरों पर    संभव   है
·       व्यक्ति-व्यक्ति के बीच
·       व्यक्ति-समूह के बीच
·       समूह-समूह के बीच

 व्यक्ति
   (Person)



     “व्यक्ति  समाज का वह अभिन्न अंग है जिससे मिलकर कोई समाज या समूह बनता है व्यक्तियों को हम समाज को जोडने वली एक कडी की तरह समझ सकते हैं जो अन्य कडियों से सहयोग से समाज का ताना-बाना बुनती है ।

समूह
 (Group)

      “समूहएक या एक से अधिक व्यक्तियों के संगठनों को  कहते हैं जिसका उद्देश्य एक होता है ।



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